फरवरी का महिना

फरवरी का महिना यार सबको बहोत भाता है ,
क्यूंकि भाईसाब वही महीने में वैलेंटाइन डे आता है,

 
पुरे साल के दर्द पर मलहम यही लगता है,
छोटा बड़ा गिफ्ट देके हर हसबंड पत्नी को पटाता है,
 
जिसका हसना बंद नहीं, वो आशा की किरण पाता है ( हसना बंद  नहीं = हसबंड नहीं)
पांच छे कार्ड ट्राय करके, कही तो तीर लग जाता है,
 
तीर इ नज़र ये दिल से फिर सीधा मन्ड़प सजाता है,
चिड़िया पकड़ने वाला आज अपने आपको फंसाता है,
 
क्या से क्या हो गया कहेके, दो घूंट रोज घट्काता है,
अगर दारू की सांगत नहीं, तो कोई मनहुस बन हँसाता है,
 
– मनीष ( मनहुस  🙂 )
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Published in: on फ़रवरी 3, 2013 at 6:32 अपराह्न  टिप्पणी करे  

हम हम है बाकी सब पानी कम है

हम हम है बाकी सब पानी कम है,
आज के नेताओका यही तो धरम है,
कुसीँ के खेल के बाजीगर है ये,
सच कहु तो यार इनमे बडा दम है,

सचाइ से कया हासील है यार यहा तो पैसा भगवान है,
हम तो जानवर से रहे गये हे बस वही लोग इनसान है,
एकटीग मे साले ये, साहरुख अमीताभ से भी महान है,
आजकल पोलीटीकश की हर जगह खुल गइ दुकान है,

जीस मा का दूध पी कर बडे हुए है,
प्रुव कर सकते है की वो वीसकी-रम है,
कुसीँ के खेल के बाजीगर है ये,
सच कहु तो यार इनमे बडा दम है

Published in: on जून 8, 2008 at 3:44 अपराह्न  Comments (4)  
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हर सख्‍श अपनी तनहाइ मे

हर सख्‍श अपनी तनहाइ मे अपनी परछाइ को ढुंढता है,
चहेरो पर चढे चहेरो के पीछे की सच्‍चाइ को  ढुंढता है,

खामोश निगाहोँ के पीछे छुपे ददँ को,
हँसते हुए होठोँ मे सीमटे हुए गम को,
दील मे सीसकीया लेती धडकन को,
साँसो मे लीपटे हर उस एक पल को,

बीन बताये सब जानले ऐसे कोइ हरजाई को ढुंढता है,
हर सख्‍श अपनी तनहाइ मे अपनी परछाइ को ढुंढता है,

Published in: on मई 6, 2008 at 3:31 अपराह्न  Comments (1)  
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दील हो गया है दीवाना

दील हो गया है दीवाना,
जब से तुजे देखा जानेजाना,

खयालो मे तेरे मै रहेता हु,
सब से अब मै ये कहेता हु,

क्‍या दोस्‍तो यही प्‍यार है,
या मुजको चढा बुखार है,
तु अगर जो हा कहेदे तो,
हम कभी के तैयार है,

डोली लेके तेरे दर आयेंगे,
तुजको अपने दील मे बसायेंगे,
सपने जो देखे है सारे हमने,
सच सारे हो जायेंगे,

हरपल होठोपे तेरा है अफसाना,
तुजको ही मैने अपना है माना….

दील हो गया है दीवाना,
जब से तुजे देखा जानेजाना,

Published in: on मई 5, 2008 at 4:14 अपराह्न  Comments (1)  
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तुम घुघंट मे गुमसुम बेठी हो

नयी दुल्‍हन के लीये….

तुम घुघंट मे गुमसुम बेठी हो, क्‍या सपने सजा रही हो सनम,
ये संसार नया है, प्‍यार नया, नयी दुनीया मे है पहेला कदम,

सपने सजाकर तुम लाइ हो,
थोडी थोडी गभराइ हो,
वो हल्‍का सा मुसकाइ हो,

छोड के संसार, अपने लोगो का प्‍यार , नीभाने आइ हो ये धरम,
तुम घुघंट मे गुमसुम बेठी हो, क्‍या सपने सजा रही हो सनम,

Published in: on अप्रैल 13, 2008 at 4:55 अपराह्न  Comments (2)  
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न्‍युज और टीवी –

न्‍युज और टीवी , वाह कया रंग दिखलाते है ,
अच्‍छे अच्‍छे पहेलवानो को ये नचाते है ,

खलि कि खलबलि ,
देखो ना कित्तनी चली,
जादु के नये कारनामे,
टाइमपास के अफसाने,

एक ना एक सीन ये हजार बार दीखाते है,
मन मंदीर मे आके कीतनी घंटी बजाते है,

कही पथ्‍थरो की बारिश,
तो कही नेता की सीफारिश,
मौत के नये नये फंडे,
चाहे संडे हो या मंडे,

हर महीने इक बच्‍चे को टयुब मे गीराते है,
कुछ ना मीले तो आदमी को हवा मे ऊडाते है,

सलमान को बहोत नीचोडा,
संजय को भी नही छोडा,
राखी तो उनकी एम्‍प्‍लोइ है,
दीपीका लफडो मे खोइ है,

प्रेरना की शादीयाँ, तलाख कीतनी बार करवाते है,
बजाज को मारकर साला वापस जिदां ले आते है,
बानी को घर घर अच्‍छी बहू बनाते है,
फिर डांस शो मे उसीसे केब्रे करवाते है,

चलो दोस्‍तो ये सब हम साथ मे बंध कराते है,
लोगो तक बात पहुचाने हम भी नया न्‍युज चैनल लाते है 

Published in: on अप्रैल 7, 2008 at 3:53 अपराह्न  Comments (1)  
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कल कल मे खुशीयो का पल बीता जाये

कल कल मे खुशीयो का पल बीता जाये,
कुछ न बन पाये वो, कुछ न कर पाये,

प्‍यार है तो साला, हम ये सोचेगें,
आज नही यारो, उसको कल कहेगें,
दील मे छुपा है जो, दील मे रहेगा,
वो बीना मतलब कि ही बातें कहेगा,

कल कल के चक्‍कर मे, सुरज ये ढल जाये,
रात के अधेरे मे , ऊम्‍मीदे    निकल जाये,

दोस्‍तो से चार बाते, चलो कल करेंगे,
प्‍यार से मुलाकाते, चलो कल करेंगे,
बुरा कुछ कहेना है, फट से वो कहेंगे,
अच्‍छा भला कहेने मे वो पीछे ही रहेंगे,

करना है जो तुजको, आज ही तु करले,
जो सब है सपनो मे, जीवन मे तु भरले,

दामन तुम्‍हारा भी हर खुशी से भर जाये
तेरी सारी दुनीया, फुल्‍टु स्‍वगँ बन जाये..

….कल कल मे खुशीयो का पल बीता जाये,

Published in: on मार्च 28, 2008 at 3:14 अपराह्न  Comments (1)  
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जिदंगी बहे गइ है

जो चाहा था ना मिला, ददँ दिल मे अब तक भरा,
जिदंगी बहे गइ है यारो, बहेते आँसु की तरहा,

प्‍यार मागां ना मिला, संसार मागां ना मिला,
मेरे प्‍यार का थोडा सा, दीदार मागां ना मिला,

तकदीर से उम्‍मीद बांधी के आशीयाँ वो मिल जाये,
हर पल मुजे खुशीयो का आसमाँ  वो मिल जाये,

रहे गया है बस तेरी ये हसीन यादो का आसरा,
जिदंगी बहे गइ है यारो, बहेते आँसु की तरहा,

Published in: on मार्च 20, 2008 at 3:18 अपराह्न  Comments (1)  
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प्‍यार क्‍या है?

प्‍यार क्‍या है? जरा नीचे पढिये वो कैसा होता है,
प्‍यार दिल का दरिया है, जिस मे डुब जाना होता है,
प्‍यार वो आग है, जिस मे खुद को जलाना होता है,
प्‍यार वो कस्‍ती है, जिसका कीनारा अन्‍जाना होता है,

प्‍यार आसु की धारा है,
प्‍यार जीने का सहारा है,
प्‍यार सारे जग से प्‍यारा है,
हमने भी प्‍यार को सवारा है,

प्‍यार पतली सी डोर है, जिसे तुटने से बचाना होता है,
प्‍यार ऐक सपना है, जिसमे सोने का बहाना होता है,
प्‍यार खट्‍टा-मीठा है, जिसमे रुठना मनाना होता है,

प्‍यार हर दिल का अरमाँ है,
प्‍यार प्रेमीऔ का भगवान है,
प्‍यार हर धमँ मे समान है,
प्‍यार मरते दम तक जवान है,

प्‍यार जीवन संगीत है, जिसे हर इक को गाना होता है,
प्‍यार इक ऐसी चीज है, जिसका दुश्‍मन जमाना होता है,
हो भले ही कीतना ही ददँ, पर खुशी का तराना होता है,
प्‍यार तो हर एक दील मे है, सिफँ उसको जगाना होता है,

Published in: on मार्च 17, 2008 at 5:05 अपराह्न  Comments (9)  
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दील खाली है, आशीयाँ भी

दील खाली है, आशीयाँ भी खाली सा लगे,
तुम बिन मुजे ये जहाँ भी खाली सा लगे,
तडप रहा हु तेरी यादो मे ओ मेरे सनम,
अब ये घटा और ये समा भी खाली सा लगे,

तुमको देखा तो मोहब्‍बत क्‍या है, ये जाना,
तेरी ही आखो से प्‍यार का जहाँ पहेचाना,
खुली है आखेँ मगर, सपने तुम्‍हारे है सनम,
इन पतझड के मौसम मे भी बहाँरे है सनम,

महल मेरा तुम बीन दीलोजाँ खाली सा लगे
प्‍यार बीना तेरे, गुलिस्‍ताँ भी खाली सा लगे,

दील खाली है, आशीयाँ भी खाली सा लगे,
तुम बिन मुजे ये जहाँ भी खाली सा लगे,