कस्मकस है साँसो की, लम्हो की बरसाते है,
कुछ खट्टे है, कुछ मीठे है, और कुछ पुरानि यादे है,
वो बचपन की मासुमियत हमे आज भी याद आती है,
वो हंसी हरदम होठो पे, हमे आज भी हसाती है,
हम आज उन लम्हो को पाने के लिये तरसते है,
और ददँ के टुकडे आज यारो आखो से सरकते है,
दील को छु जाती है, वो कुछ हसीन बाते है,
कस्मकस है साँसो की, लम्हो की बरसाते है,
कुछ खट्टे है, कुछ मीठे है, और कुछ पुरानि यादे है,
दील को छु जाती है, वो कुछ हसीन बाते है,
कस्मकस है साँसो की, लम्हो की बरसाते है,
कुछ खट्टे है, कुछ मीठे है, और कुछ पुरानि यादे है,
” waah waah, bhut khub,bhut acche bhav ,acchee lgee”
Loved reading it ya