गम ही गम है, ददँ ही ददँ है, दील के हर कोने मे,
जिदंगी बहे गइ यारो, सिफँ और सिफँ रोने मे,
क्या क्या सपने सजाये मैने मेरी तनहाइऔ मे,
उड गये सारे सपने , सिफँ और सिफँ सोने मे,
जब उठता हु तो क्या पाता हु,
थोडा अपनी मौत से गबराता हु,
फीर तकदिर को अपनी समजाता हु,
पाया तो कुछ नही, ददँ मीला मोहबत्ते खोने मे,
गम ही गम है, ददँ ही ददँ है, दील के हर कोने मे,
आसु की धारा है सुबह से शाम,
लब पर है मेरे सिफँ तेरा नाम,
पी रहा हु मै बस जाम पे जाम,
हर सपना मैने गवा दीया, सिफँ उनके होने मे,
गम ही गम है, ददँ ही ददँ है, दील के हर कोने मे,
क्या मिला मुजे, क्या मेरे पास आया,
कैसे कैसे अपने मन को बहेलाया,
आखिर ददँ के धब्बो को दिल पे पाया,
अब काट रहा हु जिदंगी, इन्ही धब्बो को धोने मे,
गम ही गम है, ददँ ही ददँ है, दील के हर कोने मे,
गम ही गम है, ददँ ही ददँ है, दील के हर कोने मे,
जिदंगी बहे गइ यारो, सिफँ और सिफँ रोने मे,
क्या मिला मुजे, क्या मेरे पास आया,
कैसे कैसे अपने मन को बहेलाया,
आखिर ददँ के धब्बो को दिल पे पाया,
अब काट रहा हु जिदंगी, इन्ही धब्बो को धोने मे,
गम ही गम है, ददँ ही ददँ है, दील के हर कोने मे,
” kyaa baat hai, manish, bhut acchey,
“ittna dard simtta hai kyun thumahre seeney mey, kyun peeney ka sahara laitey ho jeeney mey”
keep it up
Great Manish,
I have never seen your this ability. Its really very nice poems, Gazals…. I am right, u r Genius.
Regards,
Vijay Modi